Hindu-Shakti

उत्तराखंड एवं भारत में इस्लामिक ताकतों का मुँह तोड़ जबाब देने के लिए हिन्दू संत समाज को हिन्दू हितों के लिये कट्टरता दिखानी होगी

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कट्टर सनातनी हिन्दू हितेश भारद्वाज ने कल कैराना व उत्तर प्रदेश के उप चुनावों के बाद हिन्दुओं पर हुए हमले व इस्लाम की जीत पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जैसे जैसे देश में अगला लोकसभा का चुनाव नजदीक आ रहा है बहुत से लोग एक्टिव हो रहे है, राजनेता तो एक्टिव है ही, सभी सेक्युलर और वामपंथी नेता अपने मतभेद भुलाकर एक्टिव हुए है और गठबंधन भी बनना तय हो चूका है पर सिर्फ नेता ही नहीं बल्कि मौलाना और मस्जिद तथा पादरी और चर्च भी एक्टिव है, ताकि देश में उनके पसंद की सरकार बन जाये ,भारद्वाज ने कहा कि हिन्दू समाज की तरह ही हिन्दू संत निष्क्रिय है जिसका ताज़ा उदाहरण अभी हाल में हुए कर्णाटक चुनाव में 92% मुसलमानो ने अपना वोट दिया जबकि 86% ईसाईयों ने भी अपना वोट दिया पर मात्र 58% हिन्दू ही वोट देने गए, 42% हिन्दुओ ने वोट नहीं दिया
नतीजा है कांग्रेस और जेडीएस की सरकार, अब ये तो तय है की ईसाईयों और चर्च तथा मुसलमानों और मदरसों मस्जिदों का भला ये सरकार करेगी, हिन्दुओ का तो भगवान ही मालिक है। अब अगले लोकसभा चुनाव में मोदी को हटाना चर्च और मस्जिदों का एक मकसद बन गया है, दिल्ली के चर्च ने तो फतवा दे ही दिया था उस से पहले भी कई चर्च फतवे दे चुके है, साथ ही मौलाना और मस्जिदें भी किस प्रकार अपने पसंद की सरकार लानी है उसकी रणनीति बनाने में लगे है

भारद्वाज ने कहा की मोदी को अब बस 1 ही काम करना चाहिए, वो है तुरंत से तुरंत सेकुलरिज्म छोड़कर वापस हिंदुत्व पर आना, पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी को सत्ता किसी अब्दुल और फातिमा ने नहीं दिया था, हिंदुत्व ने दिया था.

मोदी हिंदुत्व पर आते है तो अब्दुल और फातिमा की कोई जरुरत नहीं, हिन्दू एकजुट हुआ तो समूचा विपक्ष चाहे कितना भी हो जाये एकजुट, वो हिंदुत्व और मोदी का सामना नहीं कर सकेगा, और कैराना के उपचुनाव से भी ये साफ़ है.

मोदी के खिलाफ कोई लहर नहीं है, और न ही विपक्ष में ख़ास ताकत है, बीजेपी के वोटर और कार्यकर्त्ता उदास है, इसलिए वोटिंग कम है, मोदी हिंदुत्व पर आएं, कार्यकर्त्ता जोश में होगा, और बूथ पर वो लोगों को लेकर जायेगा, समूचा विपक्ष हिंदुत्व के सामने उड़ जायेगा।

भारद्वाज ने कहा की ये सब तो सक्रिय है पर इस देश में बड़े बड़े हिन्दू संत भी है, जिनके प्रशंसक भी लाखों करोडो की संख्या में है, ऐसे संत आखिर कहाँ है, वो क्यों निष्क्रिय बने हुए है, हिन्दू संत क्या सिर्फ भजन करने के लिए, कथा करने के लिए है ? हिन्दू संतों ने अपनी निष्क्रियता ऐसे ही बनाकर रखी तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में आज न हिन्दू है और न हिन्दू संत और न ही संस्कृति बची, ये हाल भारत का भी होगा, हिन्दू संतों को अपनी निष्क्रियता को त्यागना होगा अन्यथा इतिहास माफ़ नहीं करेगा जब चर्च का पादरी और मस्जिद का इमाम अपने पसंद की सरकार बनवाने के लिए एक्टिव है तो हिन्दू संत क्यों पीछे बैठे हुए है, उन्हें क्या किसी से इज़ाज़त की जरुरत है, ये निष्क्रियता देश और संस्कृति पर भारी पड़ेगी। भारद्वाज ने कहा की जब कांग्रेस की सरकार थी तब कई हिन्दू संतों को आतंकवाद के केस में भी फंसाया गया था, साध्वी को फंसाया गया था, अगर फिर वही लोग सत्ता में आते है तो हिन्दुओ के लिए जो स्तिथि होगी सो होगी, संतों का भी बुरा हाल होगा, चूँकि अभी जब सक्रिय होने की जरुरत है तो हिन्दू संत निष्क्रिय बने हुए है ।
जल्द ही हिन्दू शक्ति सभी साधु समाज एवं सभी अखाड़ा प्रमुखों से मिलकर हिन्दू जनजागृति अभियान शुरू करेगी।

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